....सुनो सुनो गन्ने का गम
हम गुड़ और चीनी खाते हैं। शराब पीते हैं। कागजों पर लिखते हैं। लेकिन गन्ने को नही समझते। जिस फसल में मिठास है, नशा है और साक्षात लक्ष्मी व सरस्वती का वास है, उस फसल की यह तौहीन। समझ से परे है. इसी दशहरे की बात है। गन्ने का पूजन होना था। बाजार गया। एक गन्ना पांच रूपये
कलम से क्रिकेटर थे प्रभाष जी
सचिन की क्रिकेट को प्रभाष जी ने करीब से देखा। स्कूल जाने वाले किशोर सचिन प्रभाष जी के लिए हमेशा दुलारे और आकर्षण का केंद्र रहे लेकिन जिस दिन सचिन सत्तरह हजारी हुए उस दिन प्रभाष जी सचिन के आउट होने के बाद गिरते विकटों को देख न सके। पत्रकारिता को नई ऊंचाईयां
ये सच तो डरावना है
देश में सर्वशिक्षा अभियान की शुरुआत को सात साल पूरे होने को हैं। अभियान की सफलता का श्रेय लेने के लिए केंद्र-राज्य सरकारों ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। सरकारे डंका पीट-पीट कर बता रही हैं कि अब 14 साल तक हर बच्चा स्कूल में है। पर, उत्तराखंड में सर्वशिक्षा अभियान
हैरतअंगेज
सात समन्दरों कीमिथकीय दूरी को लांघएक नाजुक से धागे काया चावल के चंद दानोंऔर रोली काबरस-दर-बरसमुझ तक निरापद चला आनाहैरतअंगेज है!खून से लबरेजबारूद की गंध कोनथुनों में भरेइस सशंकित सहमी दुनिया मेंतेरे नेह कायथावत बने रहनाहैरतअ
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