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'लो अपना जहां दुनिया वालो' आसासिंह मस्
| पिछली पोस्ट में दूरदर्शन के सुहाने दिनों से निकालकर 'सरब सांझी गुरबानी' का सबद 'कोई बोले राम राम' क्या सुनाया यादों का पिटारा ही खुल गया है । हल्की-सी याद बाक़ी है दूरदर्शन के दिल्ल... |
कोई बोले राम-राम कोई ख़ुदाय- दूरदर्शन
| ब्लैक एंड व्हाईट वाले दूरदर्शनी दौर की यादें ताज़ा हैं ज़ेहन में अब तक । इतने दिन गुज़र गए लेकिन टी.वी. देखने का वो रोमांच दोबारा नसीब नहीं हो सका । ब |
मैं अकेला हूं धुंध में 'पंचम' : गुलज़ार,
| कल यानी चार जनवरी को 'पंचम' की याद का दिन होता है । पंचम : आर.डी.बर्मन । 'पंचम' को गए सोलह बरस हो गए पर सोलह पल भी ऐसा नहीं लगा कि वो हमसे दूर हैं । दरअसल इस दौरान रोज़ाना पंचम के गाने कैसेट्स, कंपेक्ट डिस्क, आइ पॉड्स और एफ.एम.स्टेशनों पर लगातार बजते रहे हैं । इन गानों की श |
हरियाणा की लोकरंग में रंगा--'तू राजा की
| 'रेडियोवाणी' पर 'नीरज' का जिक्र बार-बार होता रहा है । लेकिन आज एक फिल्मी-गीत के बहाने हो रहा है । मज़े की बात ये है कि ये गीत नीरज जी ने नहीं लिखा है । तकरीबन एक साल हुआ हमने दिबाकर बैनर्जी की फि... |
ख़ुश रहो अहल-ए-वतन हम तो सफ़र करते हैं--
| भूपिंदर सिंह हमारे प्रिय गायकों में से एक हैं । और 'रेडियोवाणी' पर भूपी जी पर केंद्रित एक पूरी श्रृंखला भी हो चुकी है । अगस्त की ही तो बात है, हमारे मित्र 'डाकसाब' ने हमसे एक गाने की फ़रमाईश की । सन 1977 में आई फिल्म 'आंदोलन' का गीत--'दरो-दीवार पर हसरत से नज़र |